Powered By Blogger

सोमवार, 24 अगस्त 2020

बौद्धिकता,महिला और समाज

           बौद्धिकता,महिला और समाज

आज हम 21वीं सदी में विचरण कर रहें हैं चारो ओर दृष्टि डालने पर विकासशील समाज का बिम्ब नज़र आता है।अगर हम बौद्धिक विकास या ज्ञान की बात करें तो अगिनित दार्शनिक हज़ारों उदाहरण देते समक्ष खड़े होते हैं।महिला सशक्तिकरण की बड़ी बड़ी दलीले दी जाती हैं।नारी को शक्ति का स्थान दिया जाता है परन्तु बातों मैं या उदाहरणों में ही। स्त्री को गृह लक्ष्मी कह कर पुकारा जाता है।निश्चित तौर पर अपने आप से ही प्रश्न किया जाए कि क्या यथारता स्त्री को वह स्थान मन से दे पाते हैं। कहा भी गया है-‘जिस घर में स्त्री नहीं वह केवल चार दीवारों का मकान है।

                                  एक नववधू जब अपने ससुराल की दहलीज से होती हुई अपने जीवन साथी के साथ भीतर आ रही होती है तो न जाने कितने ही सपने दोनों संजोये शगुन की पूर्ति करते हुए प्रवेश करते हैं।जाने कब वह सब सपने कहीं पीछे छूट जाते हैं और दोनों के मध्य आना कानी शुरू हो जाती है।धीरे-धीरे यह हिंसा का रूप ले लेती है।यही घरेलू हिंसा है।घरेलू हिंसा केवल शारीरिक दुर्र्व्यवहार ही नही होती बल्कि अपने साथी को भावनात्मक रूप से परेशान करना,मौखिक रूप से गाली -गलौच करना,आर्थिक तंगी देना,बलात यौन शोषण जैसे विभिन्न रूप है। पुरुषात्मक समाज में पुरुष महिला को दबाब में रखने को ही अपना बड़पन समझते हैं। कारण कुछ भी हो पुरुष आवेश में आकर झट से स्त्री का गला पकड़-दबोच लेते है।

                            घरेलू हिंसा होने के निम्नलिखित कारण होते हैं:-

• अहँकार

• पारिवारिक समस्या

• दहेज की समस्या

• विवाहेतर दूसरे पुरुष से सम्बंध

• मानसिकता का न मिलना

• नशीले पदार्थों का सेवन

• सामंजस्य की कमी

• संदेह

• यौन शोषण 

• आर्थिक प्रतिद्वंदता

दहेज एक प्रमुख कारण है। दहेज को लेकर आये दिन कितनी ही गृह लक्ष्मियाँ प्रताड़ित की जाती हैं।अपने आप को बौद्धिकता के उदाहरण समझने वाले पढे-लिखे लोग भी दहेज को लेकर घरेलू हिंसा समाज की नज़र से बचने के लिए वह शारीरिक यातनाएं न देते हुए भावनात्मक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं।

                             कितनी ही बार अहंकार भी हिंसा का कारण बनता है।कईं बार स्त्री अगर पुरुष से अधिक कमाती हो या उसे अत्याधिक तारीफ मिलती हो तो पुरुष स्वयं को dominant महसूस करता है तो भी वह आवेश में आकर हिंसा पर उतारू हो जाता है।

                       नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले पुरुष unconscious होकर घर पर तोड़ फोड़ और महिलाओं पर हाथ उठाते हैं।

              अतः घरेलू हिंसा का कारण  कोई भी हो लेकिन इसका अधिकार किसी भी व्यक्ति को नहीं हैं।मुशिकलों के हल खोजने की आवयश्कता है और अत्याचार करने वाले से अत्याचार सहने वाला बड़ा होता है। इस स्थिति में कानों7 की मदद लेनी चाहिए।हर व्यक्ति को घरेलू हिंसा संबंधित कानूनों की जानकारी हिनी चाहिए।

महिला संकरक्षण अधिनियम 2005 महिलाओं के लिए है।

धारा 5,6,7 आदि के अनुसार महिलाएं उन पर होने वाले शोषण के खिलाफ आवज़ उठा कर कानून की मदद ले सकती है।महिलाओं के लिए जगह-जगह पर वीमेन सेल भी बने हुए है।



Name :- Rajni Sharma (writer)

Designation:- J&k state govt. Teacher


     


4 टिप्‍पणियां:

आलेख

आलेख- बचपन क्यों नहीं बचपन जैसा

                  बचपन क्यों नहीं बचपन जैसा बचपन एक ऐसी सरल एवं सहज अनुभूति है जिसका स्मरण आते ही मन हिलोरे खाने लग जाता है। मान...