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बुधवार, 19 अगस्त 2020

"बेटियों की उड़ान को विकल्प न बनायें"

 "बेटियों की उड़ान को विकल्प न बनायें"

प्रकृति की खूबसूरत रचना बेटी जो संस्कृति की रक्षक एवं वाहिका भी होती है। दो परिवारों को संस्कारवान बनाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। प्रत्येक त्यौहार,पर्व,व्रत,विवाह आदि जैसी जिम्मेदारियों को पूरे विधि-विधानुसार निभाती हैं। कन्या पूजन से लेकर धार्मिक परम्पराओं से सम्बंधित यज्ञ,हवन आदि में भी पति के साथ बैठकर यज्ञ आहुति देती है।

21वीं सदी की बेटियाँ घर की देहरी से निकलकर प्रत्येक क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं। वे आत्म निर्भर,आत्म स्वावलम्बी बनकर समाज में एक नयी इबारत लिख रही हैं।

            एक समय था जब बेटी के जन्म लेने पर माता-पिता उदास हो जाया करते थे परन्तु आज बेटियों ने हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़े हैं वे साबित करने में सक्षम रही हैं कि वे भी बेटों से पीछे नहीं हैं। घर की चाहरदीवारी के बाहर भी उनकी एक पहचान है। आज बेटियों के प्रति अभिभावकों का नज़रिया बदल रहा है।

             आज भी जब बेटियों की शिक्षा तथा सहयोग पर चर्चा एवं विचार-विमर्श किया जाता है तो प्रेरणा हेतु किरण बेदी,इंदिरा गाँधी,सानिया मिर्ज़ा,गीता फौगत इत्यादि जैसे नाम सर्वप्रथम जुबान पर आ जाते है और हमारे देश की इन बेटियों पर गर्व महसूस होता है। जिनका भारत की तस्वीर बदलने में कुछ अंशों तक हाथ रहा है। उदाहरण के रुप में यह ऐसे नाम भी है जो बेटियों की उड़ान के विकल्प पर प्रश्न चिन्ह भी लगाते हैं जैसे सानिया मिर्ज़ा,इंदिरा गाँधी आदि प्रसिद्ध नाम जिनके परिवार में भाई नही थे। कहीं न कहीं मस्तिष्क में विचारों की एक परत ऐसी भी बनती है जो विचारने पर मजबूर करती है कि परिवार में बेटा न होने के कारण बेटियों को उड़ान कहीं विकल्प के रुप में तो नहीं दी गयी। परन्तु इन बातों को नकारते हुए दूसरी ओर बेटियों की सफलता पर परिचर्चा  करते समय  या उदहरण देते हुए लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार,निर्देशक एकता कपूर , वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त, खिलाड़ी साईना नेहवाल,प्रसिद्ध भारतीय लेखिका अरुंधती राय  आदि के नाम प्रेरणा रुप सामने आते हैं जिनके परिवार में भाई होने के बावजूद भी उन्हें उनके अभिभावकों का भरपूर सहयोग मिला।राहों में आती कठिनाइयों को बिना डर के पीछे धकेलती रहीं। अभिभावकों का कर्तव्य बनता है वह अपनी बेटियों को कभी एहसास न होने दें कि घर में बेटा होना ज्यादा आवश्यक है ।बेटा-बेटी दोनों की उड़ान को एक आकाश प्रदान करें न कि इतेफाक बनाएं।

             कल को बेहतर बनाने के लिए बेटियों को बचाना जरुरी है। बेटियां हमारी अमूल्य धरोहर है। उनके स्व एवं अस्मिता को बचाए रखना हमारा कर्तव्य बनता है। आज भी बहुत से लोगों की दकियानूसी विचारधारा है वे बेटों को ही तवज्जों देते हैं और बेटियों को या तो भ्रूण में खत्म कर देते हैं अन्यथा जन्म लेने के बाद उनका सही से पालन पोषण नहीं करते । अत: उन अभिभावकों को बेटी के जन्म पर केवल यह सोचना चाहिए कि हमारी बेटी भी कल की कल्पना चावला,मैरीकॉम, प्रतिभा पाटिल आदि जैसी बनकर हमारा और हमारे राष्ट्र का नाम गौरवन्तित करेंगी।



रजनी शर्मा (लेखिका)


5 टिप्‍पणियां:

  1. Courage, sacrifice, determination, commitment, toughness, heart, talent, guts. That’s what little girls are made of; the heck with sugar and spice. Very inspirational blog by Mrs Rajni Sharma about girls.

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  2. बेटी-बेटा एक समान!
    करते हैं सबका सम्मान!
    बहुत ही बढ़िया लेख।
    भविष्य में भी हमसे साझा करते रहें।

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  3. बहुत बढ़िया लेख....
    आगे भी लिखती रहें,,

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